बहुत समय पहले की बात है। धरती के एक कोने में एक बहुत ही घना और खूबसूरत जंगल हुआ करता था। चारों तरफ ऊँचे-ऊँचे पेड़, लहराती हुई घासें और बहते झरनों की आवाज़ें उस जंगल को जादू जैसा बना देती थीं। सूरज की किरणें जब पेड़ों से छनकर ज़मीन पर पड़तीं, तो लगता जैसे जंगल सोने की चादर ओढ़ लेता है।
इस जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे – शेर, हाथी, लोमड़ी, खरगोश, बंदर, हिरन और न जाने कितने पक्षी। सब मिल-जुलकर रहते थे। शेर ‘बदराज’ जंगल का राजा था। वह बहादुर और समझदार था। हाथी ‘गजेश’ उसका मंत्री था, लोमड़ी ‘झिरी’ उसकी सलाहकार और उल्लू ‘बुद्धू महाराज’ उसका मार्गदर्शक।
लेकिन इस जंगल की सबसे अनोखी बात थी एक छोटा सा खरगोश – ‘चिंकू’। वह न तो ताकतवर था, न ही बड़ा, लेकिन उसकी समझदारी और हिम्मत की कोई तुलना नहीं थी। वह हमेशा कुछ नया सीखने की कोशिश करता, हर किसी की मदद करता और सबसे विनम्रता से बात करता।
जंगल पर संकट
एक दिन जंगल के पास वाले गाँव से कुछ शिकारी आ गए। उन्होंने जंगल के बाहर डेरा डाल दिया और रोज़ एक-एक जानवर को पकड़ने की कोशिश करने लगे। पहले हिरन पकड़े गए, फिर कुछ पक्षी और फिर एक छोटी गिलहरी भी गायब हो गई।
अब जंगल में डर का माहौल बन गया। जानवर बाहर निकलने से डरने लगे। खेलना-कूदना बंद हो गया और जंगल की रौनक धीरे-धीरे खत्म होने लगी। शेर राजा बहुत चिंतित हो गया।
जंगल की सभा
राजा ने तुरंत जंगल की सभा बुलाई। सभी जानवर इकट्ठा हुए।
शेर गरजते हुए बोला, “हमें इन शिकारियों से अपना जंगल बचाना होगा।”
हाथी बोला, “हमें एक साथ उन पर हमला कर देना चाहिए।”
लोमड़ी ने समझदारी से कहा, “अगर वे हथियार लेकर तैयार हों, तो हम सबको नुकसान हो सकता है। सोच-समझकर काम करना होगा।”
सभी जानवर सोच में पड़ गए। तभी पीछे से एक धीमी आवाज़ आई – “अगर इजाजत हो तो मैं कुछ कह सकता हूँ?”
सबने देखा – यह चिंकू खरगोश था।
शेर ने थोड़ा मुस्कराते हुए पूछा, “क्या तुम्हारे पास कोई योजना है, चिंकू?”
चिंकू बोला, “हां महाराज। अगर सब मेरा साथ दें, तो मैं उन्हें बिना लड़े ही जंगल से भगा सकता हूँ।”
चिंकू की योजना
अगले दिन चिंकू शिकारियों के पास गया। उसने डरते-डरते कहा, “साहब! मैंने जंगल के अंदर एक पुराना मंदिर देखा है जिसमें खजाना छिपा है। अगर आप चाहें तो मैं आपको वहां ले जा सकता हूँ।”
शिकारी चौक गए। उनमें से एक बोला, “अगर तू हमें सही जगह ले गया तो इनाम मिलेगा। नहीं तो...!”
चिंकू बोला, “लेकिन एक बात है – उस मंदिर में सिर्फ सुबह 4 बजे ही जाना ठीक रहता है, वरना वहां अजीब-अजीब आवाजें आने लगती हैं।”
शिकारी लालच में आ गए और मान गए।
शिकारी फँस गए
अगली सुबह चार बजे चिंकू उन्हें उस मंदिर वाले रास्ते पर ले गया, जो जंगल के अंदर एक सुनसान और डरावना इलाका था। वहां जानवरों ने पहले से जाल तैयार कर रखा था – पेड़ों पर रस्सियाँ, कीचड़ में फिसलने के लिए गड्ढे, और झाड़ियों में छुपे शेर और हाथी।
जैसे ही शिकारी उस जगह पहुँचे, अचानक बंदरों ने रस्सियाँ फेंकीं, हाथी ने कीचड़ उछाला और शेर ने एक जोरदार दहाड़ मारी। शिकारी डर के मारे भाग खड़े हुए। वे अपने जाल, सामान और हथियार वहीं छोड़ गए और फिर कभी जंगल की तरफ मुड़कर नहीं देखा।
चिंकू बना हीरो
अब जंगल में फिर से शांति लौट आई। पक्षी गाने लगे, हिरन दौड़ने लगे और सबके चेहरे पर मुस्कान लौट आई।
राजा शेर ने चिंकू को बुलाया और कहा, “आज से तुम जंगल के सबसे चतुर और बहादुर जानवर माने जाओगे। तुम हमारे सलाहकार हो।”
सभी जानवरों ने जोर-जोर से तालियाँ बजाईं। चिंकू थोड़ा शर्माया, लेकिन उसके चेहरे पर एक सच्ची मुस्कान थी। उसने साबित कर दिया था कि छोटा दिखने वाला भी बड़ा काम कर सकता है अगर उसमें अक्ल और हिम्मत हो।
कहानी की मोरल सीख:
1. सिर्फ ताकत से नहीं, अक्ल और हिम्मत से भी जीत हासिल की जा सकती है।
2. जब सब मिलकर काम करें, तो कोई भी मुश्किल आसान हो सकती है।
3. छोटे दिखने वाले को कभी कम मत आंकिए वह भी बड़ा बदलाव ला सकता है।
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